बछौर
उत्तर बिहार की देसी भारवाहक नस्ल, जिसका नाम सीतामढ़ी के बछौर क्षेत्र पर पड़ा। यह हरियाणा नस्ल से मिलती-जुलती है और अथक बैलों के लिए स्थानीय रूप से बहुत मूल्यवान है।
BECHAUR
शारीरिक विशेषताएँ
- रंग: धूसर से सफ़ेद; नर में आगे और पीछे के भाग पर गहरा धूसर
- सुगठित मध्यम शरीर, मज़बूत और सधे हुए पैर
- सिर के किनारों से निकलते छोटे सींग
- छोटा कूबड़ और मध्यम गलकंबल
किसानों के लिए लाभ
बिहार के मैदानों की गीली, भारी मिट्टी में बैल बख़ूबी काम करते हैं
बहुत कम लागत के चारे और मोटे चरागाह पर जीवित रहती है
स्थानीय परजीवी और नमी भरी गर्मी के प्रति मज़बूत प्रतिरोध
संकटग्रस्त देसी नस्ल — संरक्षण से स्थानीय आजीविका को सहारा
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नस्ल परिचय
- पशु प्रकार
- गाय
- उपयोग
- भारवहन
- मूल क्षेत्र
- सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा और मुज़फ़्फ़रपुर
- पाई जाती है
- बिहार
- उत्पादन
- प्रति ब्यांत 350–500 किलो (गाय कम दूध देती है)
अन्य गाय की नस्लें
KANGAYAM
भारवहन
कंगायम
तमिलनाडु
A powerful, compact draught breed of the Kongu region, traditionally maintained on protected Korangadu pasture and central to Tamil Nadu's cattle culture.
400–900 kg per lactation
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दोहरा उपयोग
कांकरेज
गुजरात, राजस्थान
The heaviest Indian draught breed and a strong milker. Kankrej was exported to the USA and Brazil, where it contributed to the Brahman and Guzerat breeds.
1,300–1,800 kg per lactation; 4.8% fat
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GIR COW
दूध
गिर
गुजरात
भारत की सर्वश्रेष्ठ दुधारू नस्लों में से एक और सबसे अधिक निर्यात की गई देसी गाय। ब्राज़ील के डेयरी उद्योग की नींव गिर पर ही टिकी है, जहाँ चुनिंदा गिर गायें अब एक ब्यांत में 10,000 किलो से अधिक दूध देती हैं।
प्रति ब्यांत 1,600–2,500 किलो; वसा 4.5–5%
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